क्या हो रहा था दुनिया में उस दिन--जब पैदा हुए थे हम
तरंग को बीस दिसंबर को शुरू किया जाना था । बीस दिसंबर मेरा जन्मदिन है । इसलिए सोचा था इसी दिन शुरू किया जाये । लेकिन आई आई टी मुंबई में विविध भारती की एक महत्त्वपूर्ण रिकॉर्डिंग में ही पूरा दिन बीत गया । इसलिए तरंग का आग़ाज़ आज किया जा रहा है ।
बहरहाल, मुझे हमेशा से ही ये जिज्ञासा रही है कि जिस दिन मेरा जन्म हुआ उस दिन दुनिया में क्या हो रहा था । विश्व राजनीति में क्या हो रहा था, खेलों की दुनिया में क्या और बाक़ी क्षेत्रों में क्या । आज छुट्टी के दिन इंटरनेट पर इस बात की पड़ताल करने का मन हुआ और ज़रा पढि़ये कि मैंने कितनी दिलचस्प बातें खोजी हैं ।
सन 1972 में जिस दिन मैं पैदा हुआ, अंतरिक्ष में अपोलो 17 को छोड़े महज़ आठ दिन हुए थे । चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इस अंतरिक्ष यान पर कड़ी नज़र रखी जा रही थी । आपको बता दें कि अपोलो-17 मनुष्यों को अंतरिक्ष में लेकर गया ग्यारहवां यान था । अंतरिक्ष में भेजा गया पहला मानव यान था vostok-1 जिसमें 12 अप्रैल 1961 को को यूरी गागरिन अंतरिक्ष में गये थे । सन 1969 में बीस जुलाई के दिन नील आर्मस्ट्रॉंग अपोलो-11 में चंद्रमा की सतह पर उतरे थे ।
बारह से बीस दिसंबर 1972 के बीच अहमदाबाद में भारत और अमेरिका के बीच satellite instructional television systems के बारे में बैठक चल रही थी और इस आशय का एक समझौता भी हुआ था । लेकिन इसकी शुरूआत तीन साल बाद यानी सन 1975 में हुई थी । भारत में टेलीविजन पर शैक्षणिक कार्यक्रमों का ये एक गहन और सफलतम प्रयोग था ।
इंटरनेटी खोजबीन और यायावरी में मुझे ये भी पता चला कि बीस दिसंबर 1972 को लंदन के The Marquee Club में मशहूर पॉप बैन्ड Queen का कंसर्ट भी हुआ था । इस बैन्ड में गिटारिस्ट Brian May, गायक Freddie Mercury, ड्रमर Roger Taylor वगैरह शामिल थे, आपको ये तो बता ही दूं कि फ्रैडी मरक्यूरी का असल नाम था फारूख बलसारा । वो भारतीय पारसी थे । क्वीन्स बैन्ड रॉक एन रोल और रॉक का बेहद मशहूर बैन्ड रहा है । इस कंसर्ट में इस बैन्ड ने great king rat, son and daughter, doing alright जैसे गाने गाये थे । इन गानों पर क्लिक करके आप इनके यू टयूब वीडियो देख सकते हैं ।
मैंने काफी माथापच्ची की और पता लगाया कि बीस दिसंबर 1972 को और क्या क्या हो रहा था संसार में । अकसर मैं अपने पिताजी से भी पूछा करता था कि जब मैं पैदा हुआ था तब भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति कौन थे, अमेरिका में या हो रहा था वगैरह । और उनकी परेशानियां बढ़ाता रहता था । लेकिन इंटरनेट के आने से काफी आसानी हो गयी है । और जब ईद के दिन फुरसत से खोजबीन का ख्याल आया, तो बड़ी दिलचस्प बातें पता चलीं । जाने माने फिल्म निर्देशक Ingmar Bergman की फिल्म Cries and Whispers का प्रीमियर Cinema I Theatre, New York में हुआ था ।
सन 1972 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे । जिनमें richard nixon अपने प्रतिद्वंद्वी George McGovern को हराकर दोबारा अमरीकी राष्ट्रपति बने थे । ये वो दौर था जब अमरीका वियतनाम युद्ध में अपने हाथ गंदे कर रहा था । जनवरी 1973 में पेरिस में वियतनाम शांति समझौता हुआ था । मतलब जिस वक्त हम इस दुनिया में आए थे वियतनाम को लेकर खींचम तान चल रही थी ।
मुझे ये भी पता करना था कि क्रिकेट की दुनिया में मेरे जन्म वाले दिन क्या हो रहा था । और मैंने पता लगा ही लिया । बीस दिसंबर को दिल्ली के फीरोज़शाह कोटला मैदान में भारत और इंग्लैन्ड के बीच टेस्ट श्रृंखला का पहला टेस्ट शुरू हुआ था । आगे चलकर इस घरेलू टेस्ट सीरिज को भारत ने 2-1 से जीत लिया था । बहरहाल आपको फीरोजशाह कोटला टेस्ट के बारे में और बता दिया जाये । दिलीप सरदेसाई का ये आखिरी टेस्ट मैच था । इसके बाद उन्होंने सन्यास ले लिया था । इस मैच में भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था ।
खोजबीन के इसी सिलसिले में मुझे मिला बीस दिसंबर 1972 यानी मेरे जन्म वाले दिन प्रकाशित हुआ न्यूयॉर्क टाईम्स का अंक । जिसमें मुख्य खबर ये छपी है कि अमरीकी सेनाओं ने पनामा में अपना फौजी ऑपरेशन शुरू कर दिया है । इस अभियान का मकसद है Gen. Manuel Antonio Noriega की सरकार को खत्म कर देना ।
तो मित्रो मैंने तो इस दिलचस्प खोज को अंदाज दे दिया । क्या आपने कभी पता करने की कोशिश की कि जिस दिन आप पैदा हुए थे तब दुनिया में क्या हो रहा था ?
19 टिप्पणियां :
पढ़कर बहुत अच्छा लगा.
जन्मदिन मुबारक हो, देर से ही सही!
३५ वर्ष १ दिन के होने की बधाई । जन्मदिन की बधाई तो एक दिन देर से दे रही हूँ किन्तु ईद की बधाई समय पर दे रही हूँ । ईद मुबारक ! हमारे हिस्से की भी सेवइयाँ खा लीजिएगा ।
घुघूती बासूती
BAHUT MUBARAK AAPKO,NAYE BLOG KI,JANAMDIN AUR EID KI BHII
आपके जन्म से चार दिन पहले ढाका में जनरल अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण किया था? बाँग्लादेश के निर्माण ने साबित कर दिया था कि धर्माधारित विभाजन से आगे और विभाजन हो सकता है-जो धर्माधारित नही था।
युनूस भाई जब इक्कीस को तरंग फ़ैली है तो हम भी इसी के जन्मदिन को आपका जन्म दिन मान लें तो क्या हर्ज है.बहुत मुबारक़ हो सालगिरह और ईद .
जन्म दिन मुबारक।
सबसे पहला ब्लॉग आपका खुला और आपके जन्मदिन के मौके पर आपको बहुत बहुत बधाई ... ईद मुबारक और आज के दिन कबाब और बिरयानी खाते हुए हमें भी याद कर लीजिएगा.
शुभकामनाएँ
जन्मदिन की बधाई और ईद मुबारक ।
और हाँ आपकी खोज बहुत पसंद आई।
तरंग शुरू करने की बधाई और शुभकामना .
बहुत कुछ हो रहा था जब आपने जन्म लिया था, पढ़कर मज़ा आया, तरंग के लिये और आपके जन्म दिन पर इतना कि आप तरंगाईत हों शुभकमानाएं ! ! !
"क्या आपने कभी पता करने की कोशिश की कि जिस दिन आप पैदा हुए थे तब दुनिया में क्या हो रहा था ? " - यूनुस
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जरूर !.....
....और वह भी तब ,जब हिन्दुस्तान तो क्या शायद दुनिया में भी कहीं इन्टरनेट की शुरुआत नहीं हुई थी ।
...और इसके लिये मुझे अच्छी खासी रकम भी खर्च करनी पडी़ थी ..........
......मुम्बई से ’टाइम्स ऑफ़ इन्डिया’ के अभिलेखागार से अपने जन्मदिन और उसके ठीक अगले दिन के अखबार की फ़ोटोकॉपी कूरियर से मंगाने के लिये !( वह इसलिये कि जन्मदिन वाले अखबार में तो एक दिन पहले की ख़बरें थीं न ! )
आज से लगभग आधी सदी पहले के ये अभिलेख मेरे पास आज भी सुरक्षित हैं ।
(और आपके जन्मदिन पर खुद मैं क्या कर रहा था वह भी अच्छी तरह याद है ;पर वह सब फिर कभी)
आपके मन में भी यह जानने का विचार आया ,यह देखकर हैरानी भरा मज़ा आया । वाकई बहुत ही अच्छी शुरुआत की आपने।
औरों के साथ मेरी भी तिहरी बधाई !!!
- वही
मान गए बॉस, क्या आईडिया लाए हो!! शानदार!!
जन्मदिन की बधाई अपन पैले ही दे चुके हैं सो ईद की मुबारकबाद, और तरंगित होने की बधाई स्वीकार कर लो। नया ब्लॉग पसंद आया।
हिंदुस्तान में ऐसे इतिहास रखने की परम्परा नहीं रही. इसका कारण रजनीश के अनुसार शायद यह है की हनारे यह जीवन को एक चक्र माना गया है जो फिर-फिर होता है. कोई चीज फिर-फिर होनी है उसका हिसाब क्या रखना. पश्चिम मे जीवन सीधी रेखा चलना माना गया है जिसके पूरा होने पर लौटना नहीं है. परन्तु यहाँ की परम्परा में जीवन चक्र है. इसीलिए जब अंग्रेज यहाँ आए तो उन्हें ताज्जुब हुआ कि यहाँ इतिहास लिखने की परम्परा ही नहीं है. उनहोंने इसे लिखने की शुरुआत की. फिर भी अच्छा लगता है इतिहास को जानना. उससे शायद अपने को ही जानने में मदद मिलती है. आपके जन्म के समय इंसान चाँद पर अपने पैर जमा रहा था. यह बड़ी घटना है. यह इंसान की ऊंची छलांग थी. मगर अब उस बात को ३५ बरस होने को आए तब सोचना पड़ता है कि वह छलांग आदमियत के कितनी काम आई. अरे मैं यह किस तंग में लिख बैठा. आपको देर से ही सही जन्म दिन की ढेर सारी बधाई. आप इतिहास के जरिये अपनी पहचान खोज रहे हैं और हम सब से उसका साझा भी कर रहे हैं उसके लिए आपको यही कह सकते हैं... तू प्यार का सागर है.. अपनी तरंग बनाये रखिये.
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद । उम्मीद करें कि जल्दी ही आप बताएंगे कि जब आप पैदा हुए तो क्या हो रहा था दुनिया में ।
हमारी ओर से भी ३ बारी बधाई --स्वीकारेँ यूनुस भाई -
१) तरँग = शान्दार शुरुआत
२) आपका जन्मदिन = वाह जी वाह !
३) ईद = कैसी खुशी लेके आया चाँद, ईद का ~~
स स्नेह
-लावण्या
प्यारे युनुस भाई,
जन्मदिन,
ईद,
तरंग
मुबारक।
-डॉ.श्रीकृष्ण राऊत
Happy B'day !
Tarang achhaa laga. yeh chittha nahi encyclopidia hai.
Asha hai Tarang aapke vicharo ka darpan banegii jaankaariyo ka bandle nahi.
annapurna
देर से आये लेकिन दुरुस्त आये हैं |
सबसे पहले जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां, मन भरके मिठाइयां खाइये और मौज मनाइये |
तरंग के प्रारंभ होने पर शुभकामनाएं, अब संगीत के अलावा भी आपके विचारों को जानने का मौका मिलेगा |
annapurna ji se sahamat hai hum bhi...kya kare, radiovani ke zariye aapne ummide bhi to badha rakhi hai...khair,aapki masrufiyaat hi is ke liye zimmedar lagati hai...aapki pasandida filmonke baare me kabhi likhiyega....
- muzammil
Pyare Yunusbhai
Janmadin aur naya Blog ki senkado badhaiyan!
Looking forward to get more and motr interesting articles in the days to come.
Rgds.
_Harshad Jangla
Atlanta, USA
Dec.25 2007
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